लेखक की कलम से

राज बंशज मूलवासी मछुआ समुदाय के लिए यह किताब शासन-सत्ता एवं व्यवस्था परिवर्तन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। शासन-सत्ता एवं व्यवस्था परिवर्तन की पूर्व शर्त है सामाजिक परिवर्तन सभी बुद्धिजीवी जानते हैं कि बड़ा लक्ष्य पूरा करने के लिए संसाधन भी उसी के अनुरूप होना चाहिए। लक्ष्य जितना बड़ा होगा उसी अनुपात में संसाधनों का निर्माण, प्रयोग उतना ही आवश्यक है। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद् कार्यक्रम प्रचार-प्रसार के साहित्य का निर्माण लेखक के तरफ से कई महत्वपूर्ण विषयों पर किताबें निषाद वंश का इतिहास, निषादों का इतिहास, भारत का असली मालिक कौन?, निषाद वीर एकलव्य, निषाद बांसुरी, मूलनिवासी संरचना, अनुशासन, नियम और शर्तें, भाषण संभाषण, प्रकाशित किया है। इसी क्रम में महायोगी निषाद मत्स्येन्र्द्र द्वारा स्थापित नाथ संप्रदाय के हत्यारे कौन? नामक पुस्तक प्रकाशित की जा रही है। जिस समाज में हम जागृति, जोड़कर संगठित कर, राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्यधारा में शामिल करना चाहते हैं। उन्हें अपने इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। लोग कई समूह में बटे हैं जिन्हें अपनी मूल पहचान का पता ही नहीं है। निषाद एक प्राचीन अर्नाय नाम है। इनका साम्राज्य गोरखपुर में कोली वंश यानी निषादों की राजधानी वर्तमान में रामगढ़ गोरखपुर के महाराजा सिंहानु निषाद, बाबा गोरखनाथ के गुरु महायोगी मत्स्येन्र्दनाथ, द्वारकापुरी के वीर एकलव्य, कालू बाबा, महारानी रासमणि देवी आदि थे। जब तक इन्हें अपने मूल पहचान की शक्ति का पता नहीं चलेगा तब तक राष्ट्रीय जन आंदोलन नहीं चला सके इस बात को ध्यान में रखते हुए यह किताब लिखी जा रही है

महायोगी मच्छैन्र्द नाथ एवं तथागत गौतम बुद्ध के क्रांतिकारी विचारधारा एवं जीवन संदेश, महापुरुषों के आंदोलनकारी विचारधारा से बहुसंख्यक मछुआ समुदाय में जागृति और जागरूकता कर, समाज जोड़ो महा जागरण अभियान द्वारा उनके मान- सम्मान, स्वाभिमान, रोटी, कपड़ा और मकान तथा खोए हुए पहचान, विरासत, शासन-सत्ता की प्राप्ति हो सके। अपने अधिकारों से अनभिज्ञ, पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी, गांव में बसने वाले गरीब, गवार, भाई एवं बहनों को जागृत कर दोस्त दुश्मन की पहचान कराकर इस व्यवस्था तथा सत्ता परिवर्तन के लिए अपनी शक्ति का निर्माण एवं संचय कर अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए संसाधन के तौर पर प्रयोग कर सकें।

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